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Monday, 17th June 2019
   
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धर्म संसार

संकष्टी चतुर्थी 2018 व्रत कथा: भगवान शंकर ने मनोकामना पूर्ति के लिए किया था यह व्रत

 संकष्टी चतुर्थी 2018 पर व्रत करके कथा पढऩे वाले व्यक्ति की मन की शक्ति प्रबल होती हैं, ऐसी मान्यता हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि यह व्रत मनोकामना पूर्ण करने के लिए भगवान शिव ने भी किया था। इस व्रत वाले दिन श्रद्धालु सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक व्रत करते हैं। शास्त्रों में कहा गया हैं कि भगवान गणेश की पूजन और उनका यह व्रत करना बेहद लाभकारी होता हैं। इस कथा के मुताबिक भगवान गणेश का संकष्टी के दिन व्रत करने से हर मनोकामना पूरी होती है और संकट टल जाते हैं।

संकष्टी चतुर्थी 2018 व्रत कथा
भगवान शिव व माता पार्वती एक बार एक नदी किनारे बैठे थे। मां पार्वती का चौपड़ खेलने का मन हुआ। मगर उस जगह और कोई नहीं था। इस खेल में हार-जीत का फैसला करने के लिए एक व्यक्ति होना चाहिए। इस पर दोनों ने एक मिट्टी की मूर्ति बनाकर उसमें जान डाल दी और उसे खेल का फैसला करने को कहा। तीन बार खेल में माता पार्वती की जीत हुई, बालक ने एक बार गलती से भगवान शिव का विजयी के रुप में नाम ले लिया। जिससे माता पार्वती क्रोधित हो गई और उस बालक को लंगड़ा बना दिया। बालक उनसे क्षमा मांगकर कहता है कि भूल हो गई मां माफ कर दीजिए।
 मां कहती हैं श्राप वापस नहीं हो सकता है, लेकिन एक उपाय करके मुक्ति पा सकते हो। इस स्थान पर संकष्टी के दिन कुछ कन्याएं पूजा करने आती हैं, तुम उनसे व्रत की विधि पूछना और उस व्रत को श्रद्धापूर्वक करना। बालक वह व्रत करता है तो भगवान गणेश उसे दर्शन देकर इच्छा पूछते हैं तो वह कहता है कि वो भगवान शिव और माता पार्वती के पास जाना चाहता है। भगवान गणेश ने उसकी इच्छा पूरी कर दी। लेकिन वहां केवल भगवान शिव मिलते हैं, दरअसल माता पार्वती भगवान शिव से रुठ कर कैलाश पर्वत छोडक़र चली जाती हैं।
भगवान शिव उससे पूछते हैं, यहां कैसे आए, तो बालक भगवान गणेश के पूजन से ये वरदान प्राप्त हुआ। फिर भगवान शिव भी माता पार्वती को मनाने यह व्रत करते हैं। तब माता पार्वती का अचानक मन बदल जाता है और वे वापस आ जाती हैं। इस कथा के मुताबिक भगवान गणेश का संकष्टी के दिन व्रत करने से हर मनोकामना पूरी होती है और संकट टल जाते हैं।
रायपुर के ज्योतिषि पंडित पीएस त्रिपाठी बताते हैं कि मन की शक्ति का कोई सानी नहीं है..  यदि मनोबल का महत्व समझ लिया जाये और उसके बढ़ाने के लिए प्रयास किया जाय तो असम्भव सफलता भी प्राप्त की जा सकती है… कहा भी गया है शरीर बल और शस्त्र बल से ऊंचा कोई बल हो सकता है तो वह मनोबल ही है.. बाधाओं का मुकाबला किए बिना लक्ष्य को स्थायी रूप से प्राप्त नहीं किया जा सकता. परिस्थितियां जीवन को बिगाड़ती ही नहीं, बनाती भी हैं। अतः हर परिस्थिति का हर कीमत पर मुकाबला कर लक्ष्य प्राप्ति तक डटे रहना ही मनोबल है।
समग्र मनोबल और निष्ठा हर बाधा को समाप्त कर व्यक्ति को मंजिल तक पहुंचा सकता है. उच्च मनोबल प्राप्त करने के लिए किसी जातक की कुंडली में उसका तीसरा भाव पापरहित, अनुकूल तथा सौम्यग्रह हो तो ऐसे लोग जीवन में बाधाओं का मुकाबला करते हुए उच्च मनोबल बनाये रखता है और सफलता प्राप्त करता है। यदि इस प्रकार की ग्रह स्थिति ना बने तो तृतीयेश की शांति कराना, मंत्रजाप करना तथा दान करना चाहिए। इसमे गणपति अथर्व का पाठ करना, हरी मुंग का दान करना.. कुवारी कन्याओ को खट्टे फल खिला कर आशीर्वाद लेना और संकष्ट का व्रत करना चाहिए।
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