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Saturday, 20th April 2019
   
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धर्म संसार

चंद्रमा की रौशनी से शरीर को होते हैं फायदे

शरद ऋतु की पूर्णिमा का यह पूर्ण चंद्र कई मायनों में खास है। आखिर क्‍यों खास होता है पूनम का ये चांद और क्‍या होते हैं इसकी रौशनी के फायदे। शरद ऋतु की पूर्णिमा का यह पूर्ण चंद्र कई मायनों में खास है। आइए आपको बताते हैं आखिर क्‍यों खास होता है पूनम का ये चांद और क्‍या होते हैं इसकी रौशनी के फायदे।

दरअसल, शरद पूर्णिमा को चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है और माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा से कुछ विशेष दिव्य गुण प्रवाहित होते हैं। इसलिए इसे कोजागरी पूर्णिमा व रस पूर्णिमा भी कहा जाता है। दरअसल, शरद पूर्णिमा को चंद्रमा सोलह कलाओं से परिपूर्ण रहता है और माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा से कुछ विशेष दिव्य गुण प्रवाहित होते हैं। इसलिए इसे कोजागरी पूर्णिमा व रस पूर्णिमा भी कहा जाता है। कई वैद्य इस दिन जीवन रक्षक विशेष औषधियों के निर्माण करते हैं। हिंदू परम्परा में रस पूर्णिमा का विशेष स्थान है। कई वैद्य इस दिन जीवन रक्षक विशेष औषधियों के निर्माण करते हैं। हिंदू परम्परा में रस पूर्णिमा का विशेष स्थान है।
 गायत्री परिवार के प्रमुख डॉ। प्रणव पण्ड्या कहते हैं कि दशहरा से लेकर पूर्णिमा तक चंद्रमा से एक विशेष प्रकार का रस झरता है, जो अनेक रोगों में संजीवनी की तरह काम करता है। दशहरा से लेकर पूर्णिमा तक चंद्रमा से एक विशेष प्रकार का रस झरता है, जो अनेक रोगों में संजीवनी की तरह काम करता है।
इसे औषधि रूप देने के लिए पूर्णिमा के दिन घरों की छतों पर खीर बनाकर रखते हैं। जब चांद की किरणें खीर पर पड़ती हैं तो वह अमृतमयी औषधि के रूप में काम करती है। इसे औषधि रूप देने के लिए पूर्णिमा के दिन घरों की छतों पर खीर बनाकर रखते हैं। जब चांद की किरणें खीर पर पड़ती हैं तो वह अमृतमयी औषधि के रूप में काम करती है।
आहार-विहार से लेकर मानसिक तनाव तथा दैवीय प्रतिकूलताओं से लेकर बैक्टीरिया, वायरस के कारण हमारी जीवन शक्ति क्षीण हो रही है। रोगों की उत्पत्ति की जड़ हमारी त्रुटिपूर्ण जीवन शैली है। आहार-विहार से लेकर मानसिक तनाव तथा दैवीय प्रतिकूलताओं से लेकर बैक्टीरिया, वायरस के कारण हमारी जीवन शक्ति क्षीण हो रही है। इससे उबरने के लिए जड़ी-बूटियों द्वारा स्वास्थ्य संरक्षण कल्प के विभिन्न सुगम प्रयोग भी दिए हैं जो आज भी परीक्षित करने पर कसौटी पर खरे उतरे हैं। शरद पूर्णिमा के दिन इसे परखा भी जाता है।
इससे उबरने के लिए जड़ी-बूटियों द्वारा स्वास्थ्य संरक्षण कल्प के विभिन्न सुगम प्रयोग भी दिए हैं जो आज भी परीक्षित करने पर कसौटी पर खरे उतरे हैं। शरद पूर्णिमा के दिन इसे परखा भी जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन कहा जाता है कि चांद 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस दिन पूरा चांद दिखाई देने पर महापूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। पूर्ण चन्द्रमा से चांदनी रात में अमृतमयी सोमवृष्टि होती है। शरद पूर्णिमा के दिन कहा जाता है कि चांद 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इस दिन पूरा चांद दिखाई देने पर महापूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। पूर्ण चन्द्रमा से चांदनी रात में अमृतमयी सोमवृष्टि होती है।
हरिद्वार के सनातनी विद्वान और वरिष्ठ पत्रकार कौशल सिखौला बताते हैं कि पूर्णिमा का यह दिन शिव के मस्तक पर आसीन चन्द्रमा से त्राटक का भी है। किरणों से बरसता अमृत चांदनी में रखे गए दूध मिश्रित चौलों या खीर में मिलकर आरोग्य प्रदान करता है। हरिद्वार के सनातनी विद्वान और वरिष्ठ पत्रकार कौशल सिखौला बताते हैं कि पूर्णिमा का यह दिन शिव के मस्तक पर आसीन चन्द्रमा से त्राटक का भी है।
किरणों से बरसता अमृत चांदनी में रखे गए दूध मिश्रित चौलों या खीर में मिलकर आरोग्य प्रदान करता है। शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। ज्योतिषाचार्य पंडित शक्तिधर शास्त्री के अनुसार शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। खीर का भोग लगाकर चांद की चांदनी में रखें और दूसरे दिन इसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें। शरद पूर्णिमा को व्रत भी रखा जाता है। यह व्रत संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है।
शरद पूर्णिमा का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी की पूजा करने से विशेष फल मिलता है। खीर का भोग लगाकर चांद की चांदनी में रखें और दूसरे दिन इसे प्रसाद स्वरूप ग्रहण करें। शरद पूर्णिमा को व्रत भी रखा जाता है। यह व्रत संतान की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि के लिए किया जाता है।
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