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Saturday, 20th April 2019
   
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धर्म संसार

सुख हो या दु:ख प्रभु में विश्वास होना सबसे जरूरी है

हमारी जिंदगी में जब कुछ होता है, तो हम सोचते हैं कि शायद हमारे करने से कुछ हो रहा है और यह भूल जाते हैं कि जो कुछ भी हो रहा है, वह प्रभु की दया और कृपा से हो रहा है। बहुत बार जब जिंदगी में कोई मुश्किल आती है, तो इंसान घबरा जाता है और सोचता है कि लगता है प्रभु ने मुझे छोड़ दिया है, प्रभु मेरा ख्याल नहीं रख रहे।

महापुरुष हमें समझाते हैं कि चाहे दिन ऐसे हों जो हमें अच्छे लगें, चाहे दिन ऐसे हों जो हमें बुरे लगें, सभी दिन प्रभु की दया से ही हमारी जिंदगी में आते हैं। जिंदगी में ऊंच-नीच आनी ही है, क्योंकि हमारे अपने पुराने कर्मों के बारे में हमें कुछ मालूम नहीं है। बहुत बार जब कठिनाई के दिन हमारी जिंदगी में आते हैं, तो उस समय हमें घबराना नहीं चाहिए। उसमें भी हमारी कुछ भलाई होती है, जो हमारी समझ में नहीं आती है।
बहुत बार हम लोग समझ नहीं पाते हैं कि हमारी जिंदगी में क्या हो रहा है। कभी मुश्किल आ गई, कभी किसी का पर्स चोरी हो गया, कभी कोई बीमार हो गया, कभी किसी के भाई-बहन की जिंदगी में तकलीफ आ गई, कभी किसी के बिजनेस में नुकसान हो गया, कभी घर में लड़ाई-झगड़ा हो गया। ऐसे में हम बहुत परेशान हो जाते हैं। हमारे अंदर बहुत हलचल पैदा हो जाती है। हम सोचने लगते हैं कि पता नहीं हमारे साथ ऐसा क्यों हो रहा है, कोई भी हमारा ख्याल नहीं कर रहा है।
लेकिन हमें जिंदगी ऐसे जीनी चाहिए जैसे गुरुवाणी में आया हैः 'तेरा भाणा मीठा लागे'। प्रभु की रजा में ही सबकुछ चल रहा है, उन्हीं के इशारे पर सब कुछ होता है। अगर यह बात इंसान की समझ में आ जाए, तो वह हर समय खुश रहेगा, हर समय शांत रहेगा, उसमें हलचल नहीं होगी और तभी वो असलियत को जान पाएगा। प्रभु में विश्वास होना सबसे ज्यादा जरूरी है। अगर विश्वास नहीं हो, तो इंसान कुछ नहीं पा सकता।
हम सबके कर्म अलग-अलग हैं, हम सबकी जिंदगी अलग-अलग है। कुछ दिन ऐसे आएंगे जो सुख-चैन से भरे होंगे, कुछ दिन ऐसे आएंगे जो दुःख-दर्द से भरे होंगे। जब हम दुःख-दर्द से भरे हुए हों, तो हमें घबराना नहीं चाहिए, हमें अपना ध्यान प्रभु की ओर रखना चाहिए। जिंदगी तो चलती रहती है, कहीं पर लेन-देन, कहीं पर नुकसान, कहीं पर फायदा, यह सब तो इंसान की जिंदगी में होता रहता है। यह सब बाहरी जीवन है। अगर अंदर से हमारा मिलाप प्रभु के साथ हो गया और हमारा संबंध प्रभु के साथ पक्का हो गया, तो फिर बाहर की ऊंच-नीच हमें परेशान नहीं कर पाती। हम सब को उस अवस्था तक पहुंचना है, और वहां हम तब पहुचेंगे जब हम ध्यान-अभ्यास में बैठेंगे।
हम सब प्रभु को पा सकते हैं, क्योंकि हम उन्हीं के अंश हैं। प्रभु हमारे बहुत करीब हैं, हमारे भीतर हैं, हमारे अंग-संग हैं। हमें सिर्फ ध्यान उनकी ओर देना है। जब हम प्रभु की ओर ध्यान देंगे, तो फिर बाहरी दुनिया की हलचल हमें परेशान नहीं कर पाएगी।
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