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Saturday, 20th April 2019
   
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धर्म संसार

वास्तु के अनुसार पूजा घर कहाँ और कैसे होना चाहिये

किसी भी घर या कार्यालय में पूजा का कमरा या पूजा घर एक महत्त्वपूर्ण व पवित्र कोना है । ये सच है कि ईश्‍वर सर्वव्यापी हैं और वे हमेशा सबका कल्याण ही करेंगे, लेकिन यह नहीं भूलना चाहिए कि दिशाओं के स्वामी भी देवता ही हैं । यह ध्यान का और शांति की जगह है । निवास के किसी भी हिस्से में स्थित पूजा के कमरे को अच्छा माना जाता है लेकिन अगर यह वास्तु के अनुसार स्थित किया तो इस कमरे से भक्तों ने ग्रहण की हुई ऊर्जा अतिरिक्त बढ़ जाती है । पूजा कक्ष के लिए वास्तु टिप्स का पालन करने से आवास के पूरे वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा में वृध्दि कर सकते हैं । आदर्श रूप से उत्तर पूर्व कोना जिसे ईशान कोना भी कहते हैं वहाँ पूजा के कमरे का निर्माण करने के लिए सबसे अच्छा क्षेत्र है । ऐसे कहा जाता कि वास्तु पुरूष जब धरती पर लेट गए थे तब उनका सिर उत्तर पूर्व दिशा में था । इस दिशा से सुबह की सूरज की किरणें वातावरण को शुध्द करती है और पूरे दिन के लिए हमें प्रेरित करती है । हालांकि, घर के निर्माण तथा घर के मालिक की जन्म तिथि पर दिशा आधारित होने के कारण यह दिशा भिन्न भिन्न हो सकती है । लेकिन चिंता की कोई आवश्यकता नहीं है क्योंकि पूजा कक्ष के लिए वास्तु में सभी दोषों के लिए उपाय हैं ।

नीचे पूजा कक्ष के लिए वास्तु टिप्स दी है :

क्या पूजा का कमरा मुख्य द्वार के सामने स्थित कर सकते हैं ? वास्तु के अनुसार, मुख्य द्वार के सामने पूजा का कमरा नहीं होना चाहिए क्योंकि इससे पूजा के कमरे में निर्मित सकारात्मकता कम हो जाती है ।

पूजा के कमरे में अंधेरे नहीं होना चाहिए । आपके घर में पूजा का कमरा भगवान का घर होता है और यह कभी भी अंधेरा नहीं होना चाहिए । पूजा के कमरे में अंधेरा होने से पूरे घर की तंदुरूस्ती पर प्रभाव पड़ता है इसलिए इस कमरे में कम-से-कम तेल का दीया लगाना शुभ होता है ।

पूजा के कमरे को सोने के कमरे में स्थित न करें क्योंकि सोने का कमरा आराम तथा दिल-बहलाव का कमरा होता है । पूजा के कमरे के उपर, नीचे या विरूध्द शौचालय स्थित नहीं होना चाहिए । इससे शौचालय की नकारात्मक ऊर्जा पूजा के कमरे के मंगलमय वातावरण को बिगाड़ देता है ।

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