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Saturday, 20th April 2019
   
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धर्म संसार

महाशिवरात्रि, भोले बाबा की पूजा में इन गलतियों से बचें

महाशिवरात्रि के बारे में शास्त्रों में ये भी कहा गया कि अगर यह व्रत मंगलवार, रविवार और शिवयोग में पड़े तो यह विशेष होता है। महाशिवरात्रि हिन्दुओं का बड़ा पर्व होता है। धर्म शास्त्रों की माने तो भगवान शंकर के पास इस सृष्टि को नष्ट करने की क्षमता है। ऐसे में उन्हें खुश रखना जरूरी है। साथ ही भगवान शंकर सभी देवताओं में सीधे होते हैं, उनकी कृपा बरसते ही जीवन धन्य हो जाता है। इसी वजह से इन्हें भोले बाबा भी कहा जाता है।

इस बार महाशिवरात्रि को लेकर कन्फ्यूजन की स्थिति बनी हुई है। कन्फ्यूजन की वजह यह है कि महाशिवरात्रि फाल्गुन कृष्ण चतुर्दशी तिथि को होती है। इस साल 13 जनवरी को पूरे दिन त्रयोदशी है और मध्यरात्रि में 11 बजकर 35 मिनट से चतुर्दशी शुरू होगी। जबकि 14 फरवरी को पूरे दिन और रात 12 बजकर 47 मिनट तक चतुर्दशी होगा। ऐसे में लोगों के बीच असमंजस है कि महाशिवरात्रि का व्रत 13 फरवरी को रखा जाए या 14 फरवरी को। हमने आपके कइस असमंजस को दूर करने के लिए  धर्मसिंधु नामक ग्रंथ का सहारा लिया, जिसमें कहा गया है कि ऐसे हालात के लिए कहा गया है 'परेद्युर्निशीथैकदेश-व्याप्तौ पूर्वेद्युः सम्पूर्णतद्व्याप्तौ पूर्वैव।।'। इन पंक्तियों का अर्थ समझें तो कहा गया है कि अगर चतुर्दशी दूसरे दिन निशीथ काल में कुछ समय के लिए हो और पहले दिन संपूर्ण भाग में हो तो पहले दिन ही महाशिवरात्रि का व्रत करना चाहिए। यानी इस बार 13 फरवरी को महाशिवरात्रि का व्रत रखें।
भगवान भोले नाथ भाव के भूखे हैं, वे किसी भी तरह से पूजा करने पर प्रसन्न हो जाते हैं। उनकी पूजा में किसी भी तरह के दिखावे की जरूरत नहीं होती है। अगर आप महाशिवरात्रि का व्रत रखते हैं या इस बार रखने की तैयारी कर रहे हैं तो कुछ बातों का ख्याल रखें। अगर नीचे दी गई सावधानियों को बरतते हुए भोले बाबा का व्रत किया जाए तो वे प्रसन्न होते हैं।
  • भगवान शंकर की पूजा में धतूरे का फूल चढ़ाया जाता है, मान्यता है कि उन्हें यह फूल पसंद है। आप भगवान शंकर पर धतूरे के अलावा कोई भी फूल चढ़ा सकते हैं, लेकिन भूलकर भी केतकी का फूल न चढ़ाएं।
  • हिन्दुओं की पूजा में तुलसी के पौधे के पत्ते का प्रयोग शुभ माना जाता है। यहां तक की प्रसाद में भी तुलसी का पत्ता डाला जाता है। वहीं भगवान शंकर की शिवलिंग पर भूलकर भीर तुलसी के पत्ते को न चढ़ाएं। मान्यता है कि तुलसी भगवान विष्णु को प्रिय है। 
  • महाशिवरात्रि के मौके पर शिवलिंग पर दूध और जल के साथ फल-फूल, चावल को मिलाकर जलाभिषेक किया जाता है। हालांकि जलाभिषेक के दौरान इस बात का ख्याल रखें कि टूट चावल का चढ़ावा नहीं किया जाए।
  • भगवान शंकर की पूजा में बेल पत्र का चढ़ावा शुभ होत है, लेकिन खंड़ित बेलपत्र भोलेबाबा पर नहीं चढ़ाए। वही बेलपत्र चढ़ाएं जो तीन पत्तों वाले हों। कीड़े खाए हुए बेलपत्र भी भगवान पर न चढ़ाएं।
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