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Monday, 17th June 2019
   
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धर्म संसार

कुम्भ संक्रांति तब मनाई जाती है जब सूर्य कुंभ राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है

कुम्भ संक्रांति तब मनाई जाती है जब सूर्य कुंभ राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है यह हिन्दू पंचांग के अनुसार ग्यारहवें महीने की शुरुआत है यह दिन काफी शुभ होता है और सूर्य की स्थिति की वजह से यह हर साल बदलता है इस दिन दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक त्यौहार एक ही स्थान में जगह लेते है और इसमें कुंभ मेला भी आता है तो आज हम आपको कुम्भ संक्रांति के बारे म ही जानकारी देते है | कुम्भ संक्रांति हिन्दुओ के लिए बहुत ही ख़ास दिन होता है इस दिन सभी देवताओ का पवित्र नदियो गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, शिप्रा इत्यादि सभी नदियो का संगम स्थान होता है इस दिन सभी भक्त इन सभी पवित्र नदियो में वास करते है |

कुम्भ संक्रांति का पर्व जिसमे की कुम्भ मेला लगता है यह प्रत्येक 12 साल में इन सभी स्थानों में ‘कुम्भ मेला’ आयोजित किया जाता है इस साल कुम्भ संक्रांति 13  फरवरी को है |
 
कुम्भ मेला  से अयुजित किया जाता है यह राजा हर्षवर्धन के समय की बात है उस समय राजा हर्षवर्धन का शासन था भगवद पुराण में भी कुम्भ मेले की अवधि के दौरान कुम्भ संक्रांति का उल्लेख आता है सभी भक्त कुम्भ संक्रांति के दिन गंगा जैसे पवित्र नदी में स्नान करते है भक्त हर कुम्भ संक्रांति  पर जो शहर पवित्र नदियो के बीच से गुज़रते है वह जाकर स्नान करते है जैसे हरिद्वार में में गंगा, इलाहाबाद में यमुना, उज्जनीं में शिप्रा, नासिक में गोदावरी जैसे सभी पवित्र नदियो के संगम से वह जाकर स्नान करते है |
 
कुंभ संक्रांति के दिन अन्य सभी संक्रांति भक्तों जैसे खाद्य वस्तुओं, कपड़े और ब्राह्मण पंडितों के लिए अपनी आवश्यकताओं के सभी प्रकार के दान करना चाहिए। इस दिन गंगा नदी के पवित्र जल में स्नान करने के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है सभी भक्तो को अपने खुस समृद्ध जीवन के लिए प्रार्थना में देवी गंगा का ध्यान करना चाहिए |
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