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Monday, 10th December 2018
   
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धर्म संसार

पहली बार आए यात्रियों के लिए अनुमान लगाना मुश्किल है

केदारनाथ दर्शन के लिए पहली बार आए यात्रियों के लिए अनुमान लगाना मुश्किल है कि 5 साल पहले 16 जून 2013 को यहां भयंकर बाढ़ आई थी. सब तबाह हो गया था लेकिन अब केदारनाथ उस हादसे से उबर आया है. यात्रियों में उत्साह है. 
आज नजारा बदला हुआ है. किसी के मन में डर नहीं है. मंदाकिनी और सरस्वती नदियों के संगम के बाद ऊपर चढ़ते ही 200 मीटर दूर से ही केदारनाथ मंदिर की झलक मिलने लगती है जबकि बाढ़ के पहले 40-50 मीटर करीब पहुंचने पर ही मंदिर दिखता था. 2013 त्रासदी के दौरान यहां 12 फीट तक मलबा भर गया था. संगम से मंदिर प्रांगण तक करीब 250 मीटर दूरी का रास्ता अब 50 फीट चौड़ा कर दिया गया है. 
 हर घंटे 25 से 30 हेलीकाॅप्टर उतर सकते हैं हेलीपैड पर सीढ़ीदार रास्ते पर रबर का मैट लगा है. अब यहां नंगे पैर चलने पर भी आरामदायक लगता है. केदारनाथ हेलीपैड पर हर घंटे 25 से 30 हेलीकॉप्टर की लैंडिंग-टेकऑफ होता है. गौरीकुंड (सोनप्रयाग) से बनाया गया नया रास्ता पहले से 3 किमी लंबा हो गया है. बारिश से बचने के शेल्टर की फिलहाल कमी है. रास्ते में चाय-नाश्ते की दुकानें भी कम हैं. 
7 हजार बेड हैं उपलब्ध प्रशासन का कहना है कि जियोलॉजिकल रिपोर्ट ठीक न होने की वजह से ज्यादा दुकानों की इजाजत नहीं दी गई है. मंदिर से एक किमी के इलाके में ठहरने के लिए करीब 7 हजार बेड उपलब्ध हैं. इस साल अब तक 48 दिन में 5,95,832 लोगों ने दर्शन किये हैं
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