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Thursday, 21st June 2018
   
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धर्म संसार

पापमोचनी एकादशी का व्रत करने से दूर होंगे पाप

आमतौर भारतीय जनमानस माह में आने वाली दोनों एकादशियों के दिन उपवास रखते हैं। धार्मिक आस्थाओं में एकादशी के उपवास का बहुत महत्त्व है। वैसे तो वर्ष भर आने वाली सभी एकादशी पुण्यदायी मानी जाती हैं लेकिन चैत्र माह कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी को पापक्षय या पापमोचनी एकादशी कहा जाता है।

शक्तिशाली मंत्र कि सुनने से ही बदल जाए किस्मत

जीवन में आने वाली किसी भी तरह कि बाधाओं से छुटकारा पाने के लिए प्रतिदिन सुबह इस मंत्र का जाप करें। कहते हैं कि महाभारत में जब भीष्म पितामह बाणों की शय्या पर थे उस समय युधिष्ठिर ने उनसे पूछा कि, “कौन ऐसा है, जो सर्व व्याप्त है और सर्व शक्तिमान है?” तब उन्होंने भगवान विष्णु के एक हजार नाम बताए थे।

वैज्ञानिक भी हैं हैरान, इस मंदिर में मूर्तियां बोलती हैं

आपने मंदिर तो बहुत देखे होंगे लेकिन हम आपको बता रहे हैं ऐसे मंदिर के बारे में जहां की मूर्तियां साक्षात इंसानों की तरह बातें करती हैं। कुछ लोगों को यह पहले वहम लगता था लेकिन अब वैज्ञानिकों ने भी मान लिया है कि मंदिर परिसर में किसी के भी नहीं होने पर शब्द गूंजते रहते हैं।

कल करे सो आज कर....

एक फ़कीर नदी के किनारे बैठा था किसी ने पूछा बाबा क्या कर रहे हो? फ़कीर ने कहा इंतज़ार कर रहा हूँ की पूरी नदी बह जाएं तो फिर पार करूँ।उस व्यक्ति ने कहा कैसी बात करते हो बाबा पूरा जल बहने के इंतज़ार मे तो तुम कभी नदी पार ही नही कर पाओगे।

आखिर क्यों हँसने लगा था मेघनाद का कटा हुआ सिर?

महर्षि वाल्मीकि द्वारा रचित हिंदू धर्मग्रंथ 'रामायण' में उल्लेख मिलता है कि रावण के बेटे का नाम मेघनाद था। उसका एक नाम इंद्रजीत भी था। दोनों नाम उसकी बहादुरी के लिए दिए गए थे। दरअसल मेघनाद, इंद्र पर जीत हासिल करने के बाद इंद्रजीत कहलाया। और मेघनाद, का मेघनाद नाम मेघों की आड़ में युद्ध करने के कारण पड़ा।

पाप का गुरू कौन ?

एक पंडित जी कई वर्षों तक काशी में शास्त्रों का अध्ययन करने के बाद गांव लौटे। पूरे गांव में शोहरत हुई कि काशी से शिक्षित होकर आए हैं और धर्म से जुड़े किसी भी पहेली को सुलझा सकते हैं।

सोलह संस्कार - क्या आप जानते हैं अपने 16 संस्कारों को

मनुष्य के जन्म से लेकर मृत्यु तक सोलह अथवा सत्रह पवित्र संस्कार सम्पन्न किये जाते हैं

रोज ध्यान करने से मन होता है शांत और मिलते हैं ये फायदे

संसार में बहुत कुछ होता नहीं है लेकिन, लगने लगता है। कभी-कभी लगता है जो पहले हमारे बड़े शुभचिंतक थे, आजकल बदल से गए हैं। ऐसा लगता है, हो सकता है वैसा होता नहीं हो। माता-पिता जब बेटे की शादी करते हैं तो कई बार लगता है बहू आने के बाद बेटा बदल गया।

जाने बांकेबिहारी मंदिर में ठाकुर के दर्शन का नया समय

ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर में ग्रीष्म कालीन पूजा राग सेवा का क्रम होली की दौज को मंगलवार से प्रांरभ हो गया। इसके तहत मंदिर के दर्शन का समय परिवर्तित होने के साथ ठाकुरजी की पूजा ग्रीष्म कालीन पद्धति के अनुसार सेवायतों द्वारा की जाने लगी।

क्यों मनाएं चैत्र नवरात्रि

चैत्र शुक्ल पक्ष के नवरात्रों के साथ ही हिंदु नवसंवत्सर शुरू हो जाता हैं। जिसकी शुरुआत 28 मार्च से होगा। चैत्र महीने में आने वाले नवरात्रें को वार्षिक नवरात्रा भी कहा जाता हैं। नौ दिन तक मां दुर्गा के नौ स्वरूप की होने वाली यह आराधना साल के दो पखवाड़ों में अहम होते हैं।

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