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Monday, 10th December 2018
   
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धर्म संसार

भगवान विष्णु ने देवकी और वसुदेव के घर क्यों लिया कृष्णावतार ?

स्वायम्भुवमन्वन्तर में जब माता देवकी का पहला जन्म हुआ था, उस समय उनका नाम ‘पृश्नि’ तथा वसुदेव ‘सुतपा’ नामक प्रजापति थे। दोनों ने संतान प्राप्ति की अभिलाषा से सूखे पत्ते खाकर और कभी हवा पीकर देवताओं का बारह हजार वर्षों तक तप किया।

राधा जन्म की कहानी : ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार मां के गर्भ से नहीं जन्मी थी राधा

धर्म ग्रंथों के अनुसार, भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को राधा जन्माष्टमी का पर्व मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है कि इसी दिन व्रज में श्रीकृष्ण के प्रेयसी राधा का जन्म हुआ था। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार, राधा भी श्रीकृष्ण की तरह ही अनादि और अजन्मी हैं, उनका जन्म माता के गर्भ से नहीं हुआ। इस पुराण में देवी राधा जन्म से जुड़ी एक अद्भुत कथा का उल्लेख मिलता है।

मनुष्य का प्रारब्ध

मन्द प्रारब्ध मेरा नाम जपने से कट जाते है । तीव्र प्रारब्ध किसी सच्चे संत का संग करके श्रद्धा और विश्वास से मेरा नाम जपने पर कट जाते है । पर तीव्रतम प्रारब्ध भुगतने ही पडते है।

मथुरा में गिर्राज महाराज को छप्पनभोग

उत्तर प्रदेश में मथुरा के प्रसिद्ध गिर्राज महाराज का नये साल के आने के पहले से ही छप्पन भोग लगाने की होड़ मची हुई है। मान्यताओं के अनुसार (ठाकुरजी) ने स्वयं गिर्राज पूजन कर छप्पन भोग का आयोजन द्वापर में कराया था।

मंगल दोष से बचना है तो मंगलवार को न करें ये 3 काम

सप्ताह का हर दिन किसी न किसी ग्रह से जुड़ा होता है। इसीलिए अगर उस दिन ग्रह के अनुसार काम किए जाएं तो हमेशा ग्रहों की कृपा आप पर बनी रहेगी, वहीं उनके विपरीत जाकर काम करने से ग्रहों की नाराजगी भी झेलनी पड़ सकती है। ग्रहों की नाराजगी से हंसते खेलते व्यक्ति की जिंदगी भी बर्बाद हो जाती है।

माघ का महीना पवित्र क्यों होता है?

हिन्दू धर्म के अनुसार सभी महीनों में माघ मास का विशेष महत्व होता है। यह महीना दान-पुण्य, धर्म-कर्म और त्याग का महीना माना जाता है। मघा नक्षत्र के नाम पर इस महीने का नाम माघ होता है। हिन्दू पंचांग के अनुसार यह महीना साल का ग्यारहवां महीना होता है। माघ मास के दौरान मनुष्य को कम से कम एक बार किसी पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए।

श्रीकृष्णप्रिया राधा रानी के जन्मोत्सव

आज भाद्रपद शुक्ल अष्टमी, राधाष्टमी है. प्रभु श्रीकृष्ण की अर्धांगिनी श्रीराधारानी का आज जन्मदिवस है. पुष्टिमार्ग में आज का उत्सव भी जन्माष्टमी की भांति ही मनाया जाता है.

श्रावणी पूर्णिमा पर करेंगे लक्ष्‍मी पूजन तो होगी धन वर्षा

श्रावण मास में पूर्जा अर्चना करने से सभी फल प्राप्‍त होते हैं। श्रावण मास की पूर्णिमा पर पूजन के कुछ विशेष योग होते हैं। इस दिन पूजा करने पर भगवान की कृपा के साथ धन की भी वर्षा हो

गुरु पूर्णिमा: यह दिन क्यों विशेष है

पूजा वंदना व आस्था के समागम वाला दिन है गुरु पूर्णिमा । गुरू की पूजा वंदना व आस्था के समागम वाला दिन गुरु पूर्णिमा 9 जुलाई को मनाया जायेगा।

ऐसे करें गुरु की पूजा, सफलता के मार्ग से दूर होंगी समस्त बाधाएं

जीवन में आगे बढऩे के लिए एक श्रेष्ठ गुरु की आवश्यकता हर किसी को होती है। ऐसे ही गुरु के प्रति अपनी कृतज्ञता और समर्पण प्रकट करने का पर्व है गुरु पूर्णिमा।

गुरु पूर्णिमा - गुरु की पूजा करने का पर्व

आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। गुरु पूर्णिमा को गुरु की पूजा की जाती है। पूरे भारत में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

जगन्‍नाथपुरी के 8 रहस्‍य : यहां हवा के विपरीत दिशा में लहराता है झंडा

इस मंदिर में भगवान जगन्नाथ, भगवान बलभद्र और देवी सुभद्रा की मूर्तियां मिट्टी से नहीं बल्कि चन्दन की लकड़ी से बनी हुई हैं। इसके साथ ही हर 12 सालों बाद इन्हें बदल दिया जाता है। समुद्र के किनारे बना यह मंदिर अपने अंदर कई राज समेटे हुए है। लेकिन लोगों का मानना है कि इस मंदिर में आकर विज्ञान के सारे नियम फेल हो जाते हैं।

4 महीने पाताल में रहेंगे भगवान विष्णु

4 जुलाई 2017 को देवशयनी एकादशी है। हिन्दी पंचांग के अनुसार आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहा जाता है। इस तिथि का काफी अधिक महत्व माना गया है, क्योंकि इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने तक पाताल में शयन करते हैं।

ऐसे करें देवशयनी एकादशी का व्रत

आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी एकादशी कहते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने तक पाताल में शयन करते हैं। ये चार महीने चातुर्मास कहलाते हैं।

देवशयनी एकादशी व्रत की कथा

एक बार देवर्षि नारद ने ब्रह्माजी से देवशयनी एकादशी का महत्व जानना चाहा। तब ब्रह्माजी ने उन्हें बताया कि सतयुग में मांधाता नामक एक चक्रवर्ती राजा थे।

वट पूर्णिमा का व्रत, जानें कैसे होती है ये पूजा

इसमें सुहागन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु के लिए वट पूर्णिमा का व्रत रखती हैं। ज्येष्ठ माह के शुल्क पक्ष की पूर्णिमा को वट पूर्णिमा का व्रत मनाया जाता है,जो इस बार 8 जून गुरुवार को हैं।

भारत के 8 प्रमुख लक्ष्मी मंदिर

लक्ष्मी हिंदू धर्म के प्रमुख देवी-देवताओं में से एक है। इन्हें धन-धान्य की देवी माना जाता है और दिवाली का त्योहार मुख्य रूप से देवी लक्ष्मी को ही समर्पित माना जाता है। दिवाली के त्योहार पर हम आपको देवी लक्ष्मी के ऐसे ही 8 मंदिरों के बारे में बताने जा रहें हैं, जो की सुंदर से साथ ही महत्वपूर्ण भी है।

अक्षय तृतीया के दिन पढ़ें यह मंत्र, चमकेगा 100 प्रतिशत भाग्य

अक्षय तृतीया के दिन सुबह जल्दी उठकर नित्य कर्मों से निपट कर तांबे के बर्तन में शुद्ध जल लेकर भगवान सूर्य को पूर्व की ओर मुख करके चढ़ाएं तथा इस मंत्र का जप करें-

अक्षय तृतीया की प्रमुख पौराणिक कथा - जब कान्हा से मिले सुदामा

एक पौराणिक कथा के अनुसार महाभारत के काल में जब पांडव वनवास में थे, तब एक दिन श्रीकृष्ण जो स्वयं भगवान विष्णु के अवतार है, ने उन्हें एक अक्षय पात्र उपहार स्वरुप दिया था। यह ऐसा पात्र था जो कभी भी खाली नहीं होता था

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