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Sunday, 22nd September 2019
   
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धर्म संसार

महाशिवरात्रि, भोले बाबा की पूजा में इन गलतियों से बचें

महाशिवरात्रि के बारे में शास्त्रों में ये भी कहा गया कि अगर यह व्रत मंगलवार, रविवार और शिवयोग में पड़े तो यह विशेष होता है। महाशिवरात्रि हिन्दुओं का बड़ा पर्व होता है। धर्म शास्त्रों की माने तो भगवान शंकर के पास इस सृष्टि को नष्ट करने की क्षमता है। ऐसे में उन्हें खुश रखना जरूरी है। साथ ही भगवान शंकर सभी देवताओं में सीधे होते हैं, उनकी कृपा बरसते ही जीवन धन्य हो जाता है। इसी वजह से इन्हें भोले बाबा भी कहा जाता है।

घर में सुख-शांति के लिए वास्‍तु टिप्‍स

हां यदि आप बना-बनाया मकान या फ्लैट खरीदने जा रहे हैं, तो वास्‍तु संबंधित निम्‍न बातों का ध्‍यान रख कर अपने लिए सुंदर मकान तलाश सकते हैं। और भी हैं वास्‍तु शास्‍त्र से जुड़े लेख कई बार ऐसा भी होता है कि आप तमाम पूजा-पाठ करते हैं, लेकिन अच्‍छे फल नहीं मिलते, ऐसे में आप अपने घर के वास्‍तुशास्‍त्र पर ध्‍यान दें।

आसान 10 उपाय से घर में होगी सुख शांति और समृद्धि की वर्षा

कहते है कि इंसान को बनाने और बर्बाद करने में नारी का हाथ होता है। नारी चाहें तो किसी को बर्बाद कर सकती है और वो चाहें तो आबाद। लेकिन ज्यादातर जगहों पर नारी को घर की लक्ष्मी माना जाता है और नारी भी उस घर को ही अपना स्वर्ग भी मानती है। वैसे भारतीय शास्त्रों में भी लिखा है कि जहां जहाँ नारियों के पूजा होती है वहां देवताओं का वास होता है।

घर-परिवार से अन्न-धन की कमी दूर करते हैं ये सामान

आज के समय में बहुत से लोग अपने घर का निर्माण कार्य आदि वास्तुनुसार करते हैं अौर जीवन को खुशहाल बनाते हैं। वास्तु और हिंदू शास्त्रों के अनुसार घर में कुछ चीजें लाने से अन्न-धन अौर सौभाग्य में वृद्धि होती है। देवी लक्ष्मी को भी यह चीजें बहुत प्रिय हैं।

2018 में सफलता लाने के लिए वास्तु टिप्स

क्या रिश्तों के लिए वास्तू सुझाव महत्त्वपूर्ण हैं ? क्या इससे लोगों के दैनिक तथा दीर्घ कालीन रिश्तेसंबंधो में फरक पड़ता है ? इस बारे में अधिक जानकारी चाहते हैं |

महाशिवरात्रि 13 या 14 को? महाशिवरात्रि के लिए शुभ योग तिथि और मुहूर्त क्या है

शिवभक्तों का सबसे बड़ा त्योहार महाशिवरात्रि माना जाता है। इस त्योहार का भक्तगण पूरे साल इंतजार करते हैं और महाशिवरात्रि के दिन सुबह से ही शिव मंदिरों में जुटने लगते हैं। शिवभक्तों के लिए इस साल बड़ी उलझन की स्थिति बनी हुई है कि महाशिवरात्रि का त्योहार किस दिन मनाया जाएगा।

रायपुर स्थित श्री महामाया देवी का मंदिर

माँ के इन छत्तीसगढ़ों में एक गढ़ है रायपुर का महामाया मंदिर, जहां महालक्ष्मी के रूप में दर्शन देती हैं माँ महामाया और सम्लेश्वरी देवी। माँ का दरबार सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र बना हुआ है। तांत्रिक पद्धति से बने इस मंदिर में देश ही नहीं विदेशों से भी भक्त आते हैं। माता का यह मंदिर बेहद चमत्कारिक माना जाता है, यहां सच्चे मन से मांगी गई मन्नत तत्काल पूरी होती है।

इस मंदिर में विश्राम करने आते हैं स्वयं भगवान विष्णु

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के समीप राजिम में भगवान विष्णु के चार रूपों को समर्पित भगवान राजीव लोचन के मंदिर में चारों धाम की यात्रा होती है। छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहे जाने वाले राजिम में चारों धाम समाए हुए हैं। त्रिवेणी संगम पर स्थित इस मंदिर के चारों कोनों में भगवान विष्णु के चारों रूप दिखाई देते हैं।

कवर्धा के भोरमदेव मंदिर में करें शिवलिंग के दर्शन

भोरमदेव का मंदिर 7वीं से 10वीं सदी का है। मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इसका नाम गोंड राजा भोरमदेव के नाम पर पड़ा है। स्थानीय किस्सों के अनुसार इस मंदिर को राजा ने ही बनवाया था। मंदिर के गर्भगृह में एक मूर्ति है, जो मान्यता के अनुसार राजा भोरमदेव की है, हालांकि इसे सिद्ध करने के लिए कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं है।

कौशल्या का भारत में यही है एकमात्र मंदिर

छत्तीसगढ़ का प्राचीन नाम कोसल था। रामायण काल में छत्तीसगढ़ का अधिकांश भाग दण्डकारण्य क्षेत्र के अंतर्गत आता था। यह क्षेत्र उन दिनों दक्षिणापथ भी कहलाता था। यह रामवनगमन पथ के अंतर्गत है इस कारण श्रीरामचंद्र जी के यहां वनवास काल में आने की जनश्रुति मिलती है।

मथुरा का नाम सुन ले तो श्रीकृष्ण के कथा श्रवण का फल मिलता है

यदि वह मथुरा का नाम सुन ले तो श्रीकृष्ण के कथा श्रवण का फल पाता है। मथुरा का स्पर्श प्राप्त करके मनुष्य साधु संतों के स्पर्श का फल पाता है। मथुरा में रहकर किसी भी गंध को ग्रहण करने वाला मानव भगवच्चरणों पर चढ़ी हुई तुलसी के पत्र की सुगंध लेने का फल प्राप्त करता है।

महाशिवरात्रि पर भगवान शिव क्या चढ़ाने से होते हैं प्रसन्न

प्राचीन भारतीय परंपरा में फाल्गुन मास की त्रयोदशी के दिन आने वाली शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के रूप में देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है। महाशिवरात्रि के व्रत को अमोघ फल देने वाला बताया गया है। महाशिवरात्री का पर्व हिंदुओं का प्रमुख त्यौहार है।

चंद्रमा की रौशनी से शरीर को होते हैं फायदे

शरद ऋतु की पूर्णिमा का यह पूर्ण चंद्र कई मायनों में खास है। आखिर क्‍यों खास होता है पूनम का ये चांद और क्‍या होते हैं इसकी रौशनी के फायदे। शरद ऋतु की पूर्णिमा का यह पूर्ण चंद्र कई मायनों में खास है। आइए आपको बताते हैं आखिर क्‍यों खास होता है पूनम का ये चांद और क्‍या होते हैं इसकी रौशनी के फायदे।

सुख हो या दु:ख प्रभु में विश्वास होना सबसे जरूरी है

हमारी जिंदगी में जब कुछ होता है, तो हम सोचते हैं कि शायद हमारे करने से कुछ हो रहा है और यह भूल जाते हैं कि जो कुछ भी हो रहा है, वह प्रभु की दया और कृपा से हो रहा है। बहुत बार जब जिंदगी में कोई मुश्किल आती है, तो इंसान घबरा जाता है और सोचता है कि लगता है प्रभु ने मुझे छोड़ दिया है, प्रभु मेरा ख्याल नहीं रख रहे।

क्यों खास है श्रवणबेलबोला का महामस्तकाभिषेक उत्सव!

जैन संप्रदाय के लिए काशी जैसा महत्व रखने वाले श्रवणबेलगोला में हर 12 वर्ष बाद मनाया जाने वाला ‘महामस्तकाभिषेक उत्सव’ दरअसल पूरे देश की एक सांस्कृतिक धरोहर है और इतिहास, परंपरा और आस्था का कुंभ है।

इंसान के अंदर का अहंकार उसे प्रभु से दूर ले जाता है

हर एक इंसान समझता है कि जो वह कर रहा है, वह सबसे अच्छा है। वह जैसी जिंदगी जी रहा है, उससे अच्छा कुछ नहीं हो सकता। कई बार हम यह भूल जाते हैं कि सद्गुणों का जिंदगी में होना बहुत जरूरी है। इंसान यह भूल जाता है कि जब उसके अंदर घमंड पैदा हो जाता है, तो फिर उसके कदम उसे प्रभु से दूर ले जाते हैं। बहुत सी बार प्रभु की खोज में लगे हुए लोगों के अंदर भी घमंड आ जाता है।

मासिक शिवरात्रि: शिव पूजन से मिलता है अनंत फल

शिव आराधकों के लिए महाशिवरात्रि का बड़ा महत्व है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार महाशिवरात्रि की मध्य रात्रि को ही भगवान शिव लिंग रूप में प्रकट हुए थे। माना जाता है कि इसी समय ब्रह्मा और विष्णु के द्वारा पहली बार शिवलिंग का पूजन किया गया था।

कुम्भ संक्रांति तब मनाई जाती है जब सूर्य कुंभ राशि से मकर राशि में प्रवेश करता है

कुम्भ संक्रांति हिन्दुओ के लिए बहुत ही ख़ास दिन होता है इस दिन सभी देवताओ का पवित्र नदियो गंगा, यमुना, सरस्वती, गोदावरी, शिप्रा इत्यादि सभी नदियो का संगम स्थान होता है इस दिन सभी भक्त इन सभी पवित्र नदियो में वास करते है |

सबसे ऊंचा शिवधाम है कैलास मानसरोवर

बस में बैठने के साथ ही यात्रियों ने हर-हर महादेव, ओम नमो शिवाय और बम-बम भोले के जयकारे लगाए और झंडी दिखाए जाने के बाद बस काठगोदाम(नैनीताल) के लिए रवाना हुई। सफर के दौरान कुछ बुजुर्ग महिला यात्रियों ने कीर्तन-भजन का क्त्रम शुरू कर दिया।

गौतम बुद्ध के लिए कौन है अस्पृश्य

एक बार भगवान गौतम बुद्ध को मौन देखकर वहां उपस्थित उनके शिष्यों में से एक ने उनके चुप होने का कारण पूछा। कोई जवाब न पाकर उनसे दोबारा पूछा गया। तभी दूर खड़े एक व्यक्ति ने जोर से कहा, 'आज मुझे आप अपने साथ सभा में बैठने की अनुमति क्यों नहीं दे रहे?' बुद्ध ने इसका भी जवाब नहीं दिया। तभी दूसरे शिष्य ने दूर खड़े व्यक्ति को सभा में बैठाने के लिए गौतम बुद्ध से प्रार्थना की। इस पर गौतम बुद्ध ने कहा, 'वह अस्पृश्य है, उसे अनुमति नहीं दी जा सकती।'

संतान की सलामती के लिए किया जाता है सकट चौथ व्रत

सकट चौथ का यह त्योहार माघ के कृष्ण चतुर्थी को मनाया जाता है। इस दिन संकट हरण गणपति गणेशजी का पूजन होता है। यह व्रत संकटों तथा दुखों को दूर करने वाला है। इतना ही नहीं, प्राणीमात्र की सभी इच्छाएं व मनोकामनाएं भी इस व्रत के करने से पूरी हो जाती हैं। वक्रतुण्डी चतुर्थी, माही चौथ अथवा तिलकुटा चौथ इसी के अन्य नाम हैं।

संकट चौथ व्रत कथा

किसी नगर में एक कुम्भार रहता था। एक बार उसने बर्तन बनाकर आंवा लगाया तो आंवा पक ही नहीं। हारकर वह राजा के पास जाकर प्रार्थना करने लगा। राजा ने राजपंडित को बुलाकर कारण पूछा तो राल्पन्दित ने कहा की हर बार आंवा लगते समय बच्चे की बलि देने से आंवा पक जाएगा राजा का आदेश हो गया।

विजया एकादशी व्रत कथा

श्री भगवान बोले हे राजन् - फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी का नाम विजया एकादशी है। इसके व्रत के प्रभाव से मनुष्‍य को विजय प्राप्त‍ होती है। यह सब व्रतों से उत्तम व्रत है। इस विजया एकादशी के महात्म्य के श्रवण व पठन से समस्त पाप नाश को प्राप्त हो जाते हैं। एक समय देवर्षि नारदजी ने जगत् पिता ब्रह्माजी से कहा महाराज! आप मुझसे फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी विधान कहिए।

संकष्टी चतुर्थी 2018 व्रत कथा: भगवान शंकर ने मनोकामना पूर्ति के लिए किया था यह व्रत

संकष्टी चतुर्थी 2018 पर व्रत करके कथा पढऩे वाले व्यक्ति की मन की शक्ति प्रबल होती हैं, ऐसी मान्यता हैं। शास्त्रों में कहा गया है कि यह व्रत मनोकामना पूर्ण करने के लिए भगवान शिव ने भी किया था।इस व्रत वाले दिन श्रद्धालु सूर्योदय से लेकर चंद्रोदय तक व्रत करते हैं।

हटकेश्वर महादेव मंदिर के साथ जुड़ी दिलचस्प कहानी

खारुन नदी के तट पर स्थित महादेव मंदिर के पीछे त्रेता युग की एक दिलचस्प कहानी जुड़ी हुई है। जिसके चलते यहां देशभर ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। यह मंदिर खारुन नदी के तट पर होने की वजह से महादेव घाट के नाम से प्रसिद्ध है। रायपुर शहर से 8 किमी दूर स्थित 500 साल पुराना भगवान शिव का यह मंदिर प्रमुख तीर्थ स्थलों में से एक है।

तिरूपति के बाद वैष्णो देवी में लगता है भक्तों का जमावड़ा

वैष्णो देवी के तीर्थस्थान पर आने वाले एक करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं की संख्या का एक पहलू यह भी है कि तिरूपति बालाजी की तरह माता वैष्णो देवी भी देश के राजनीतिक नेताओं, फिल्मी कलाकारों और खिलाड़ियों अर्थात वीआईपी भक्तों में बेहद लोकप्रिय हैं। ऐसा शायद ही कोई दिन गुजरता होगा जब कोई नेता, फिल्मी कलाकार या खिलाड़ी माता वैष्णो देवी के दर्शनों के लिए कटड़ा न पहुंचता हो।

बारसूर में मामा भांजा मंदिर में दर्शन के लिए उमड़ते हैं श्रद्धालु

छत्तीसगढ़ के कई क्षेत्र ऐसे हैं, जहां धार्मिक स्थलों को देखने के लिए देश-दुनिया से पर्यटक आते हैं। जगदलपुर और दंतेवाड़ा क्षेत्र में भी बारसूर की ऐतिहासिक धरोहरें कुछ ऐसी ही हैं, जिन्हें देखने के लिए हर साल दूर-दूर से बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।

भगवती दर्शन की इच्छा तो आएं वैष्णो देवी के दरबार में

कटड़ा-वैष्णो देवी (जम्मू कश्मीर)। अगर आप एक पंथ दो काज अर्थात बर्फीली चोटियों की सैर और मां भगवती के दर्शनों की इच्छा रखते हैं तो वैष्णो देवी के दरबार में चले आईए।

रोजगार तलाश कर रहे हैं तो गणेशजी के पूजा करें

मध्य प्रदेश के इंदौर में एकाक्षी नारियल वाले यानी श्रीफल गणेशजी का अनोखा मंदिर है। इस मंदिर में भगवान गणेश के दर्शन कर हर कोई भक्त उन्हें देख चौंक जाता है। दरअसल यह गणेश जी की प्रतिमा एक नारियल से उभरी हुई है, जिसमें स्वयंभू प्रभु ने एकदंत मस्तक, मुकुट, नेत्र, कान, गर्दन, सूंड, मुंह, जिव्हा ने मूर्त रूप लिया। इंदौर के जूनि इंदौर में शनिमंदिर मेन रोड पर विराजमान श्रीफल सिद्धि विनायक स्वयंभू रूप में दर्शन देते हैं।

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