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Thursday, 21st June 2018
   
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धर्म संसार

माया के जाल से स्वयं को बाहर निकालें

इस शरीर का होना हमें माया की वजह से ही दिख रहा है क्योंकि शरीर का अपना अस्तित्व नहीं होता। हमारा शरीर पांच तत्वों के मेल से बना है-आग, हवा, पानी, मिट्टी और आकाश। इन सभी में से थोड़ा-थोड़ा अंश लेकर हमारे शरीर का निर्माण हुआ है। प्रत्येक शरीर में आत्मा का निवास है।

समस्याओं को लेकर चिंतित रहते हैं, इसका कारण है आपकी ये भूल

दूसरे महायुद्ध के समय केन नाम का अमरीकी फौजी बुरी तरह से घायल हो गया। डॉक्टरों को उसके दोनों पैर और हाथ की एक उंगली काटनी पड़ी। इसी बीच उसकी दोनों आंखों की रोशनी भी चली गई। जिस डॉक्टर ने केन की जान बचाने के लिए ऑप्रेशन किया था, वह उसकी इस दयनीय हालत से बहुत दुखी रहने लगा।

शनिवार को इन वस्तुओं की न करें खरीददारी, वरना भुगतना पड़ सकता है बुरा अंजाम

पूरे सप्ताह में शनिवार को काफी अहम दिन माना जाता है। इस दिन हनुमान जी पूजा तो श्रेष्ठ होती ही है, लेकिन साथ ही इस दिन शनिदेव की पूजा का भी उतना ही महत्व माना जाता है। शनिवार के दिन जो व्यक्ति पूरे श्रद्धा से शनिदेव की पूजा-अर्चना करता है, वह शनिदेव की कुदृष्टि से बचा रहता है।

रात को सोने से पूर्व ध्यान रखें ये बातें, हर प्रकार के डर से मिलेगी राहत

रात में सोते समय कई बार एेसा होता है कि सपनों में कुछ एेसी चीजें दिख जाती हैं, जिसके कारण नींद अचानक टूट जाती है और हम डरकर उठ जाते हैं। इसके कारण व्यक्ति रात भर सो नहीं पाता और सहम जाता है।

घर बनवाने से पहले प्लॉट से संबंधित इन बातों को जरूर जान लें

वास्तुशास्त्र में घर-मकान को लेकर कई बातें बताई गई हैं। जिन्हें अपनाने से व्यक्ति का जीवन सुखमय व शांतिमय हो जाता है। इसके अनुसार भूखंड या भवन लेने से पहले कुछ सावधानियां बरतनी चाहिए। तो यदि आप भी मकान निर्माण के लिए शुभ जमीन यानी प्लॉट देख रहे हैं, तो आपको भारतीय वास्तुशास्त्र की ये बातें जरुर ध्यान में रखनी चाहिए। मकान निर्माण के लिए वास्तु अनुसार शुभ भूमि का चयन करते समय इन बातों का मुख्तया ध्यान रखना चाहिए।

शनिवार के हर कोप से बचेंगे यदि इन मंत्रों से करेंगे पूजा

शनिदेव कई वजहों से अदभुत देवता के रूप में पूजनीय हैं। शनि की चाल मंद यानी धीमी मानी जाती है, और दृष्टि वक्र यानी टेढ़ी। परन्तु उनका न्याय का एकदम सीधा और सटीक होता है।

कैसे करें सत्य व ब्रह्म का ज्ञान

जंगल की खुली हवा, ताजा घास और नदियों का स्वच्छ पानी मिलने के कारण समय के साथ गायें पूरी तरह स्वस्थ हो गई। उनकी संख्या भी अधिक हो गई।

घर में चांदी के शिवलिंग की करें स्थापना, चंद्र के अशुभ प्रभाव से मिलेगा छुटकारा

माना जाता है कि किसी भी व्यक्ति पर किसी भी ग्रह का अशुभ होना व्यक्ति के लिए कई तरह की मुश्किलों सामना करना पड़ता है। इनमें से एक चंद्र ग्रह है जिसका यदि अशुभ प्रभाव किसी व्यक्ति के जीवन पर पड़े तो उसका समस्त जीवन तनाव भरा हो जाता है।

देवी त्रिपुर सुंदरी से मिलेगा सुखी दांपत्य जीवन का वरदान

त्रिपुर सुंदरी दस महाविद्याओं में से एक हैं। देवी भगवातम के अनुसार त्रिपुर सुंदरी को ही आद्या शक्ति सती कहा जाता है। पिता दक्ष द्वारा अपमान से आहत होकर जब मां सती ने अपने प्राण उत्सर्ग कर दिये तो सती के वियोग में महेश्वर उनका पार्थिव शव अपने कंधों में उठाए चारों दिशाओं में घूमने लगे।

हाथ में कपूर रखकर करें इस मंत्र का जाप, भयानक से भयानक दर्द होंगे समाप्त

कभी-कभी ऐसा होता है कि हम उपचार कराते-कराते थक जाते हैं फिर भी बीमारी नहीं जाती किंतु कोई टोटका कर दिया जाता है और बीमारी उडऩ छू हो जाती है। इसी प्रकार घर के वास्तुदोष को हटाने के भी कुछ टोटके हैं जिनके प्रयोग से कष्टों का निवारण होता है तथा सुख-समृद्धि एवं शांति की प्राप्ति होती है।

ये आसान उपाय बढ़ाएंगे घर की सुख-समृद्धि

किसी के पास सुख शांति है तो पैसा नहीं है हर व्यक्ति किसी ना किसी समस्या से परेशान है। इसलिए हमें कुछ ऐसे उपाय करने चाहिए। जिनको प्रयोग में लाने से जीवन में आपको कभी धन और सुख समृद्धि की कमी न हों और घर में हमेशा शांति का माहौल बना रहें।

श्री बृज के चार महादेव

बृज की रक्षा को महादेव यहा चार मुख्य रूपो मे विराजित है। श्री गोपेश्वर महादेव (वृन्दावन) यहा शिव गोपी रूप रख कर श्री राधामाधव की महारास लीला का दर्शन करने आऐ थे तभी से ही श्री राधा की इच्छा से सखी त्रिलोचना के रूप मे यही विराजित हैं।

शिवरात्रि पर ना करें ये काम नहीं तो भोले बाबा हो जाएंगे नाराज

देवो के देव महादेव को प्रसन्न करने के लिए शिवरात्रि का दिन बेहद ही उचित माना जाता है। मान्यता है कि शिवरात्रि के दिन सच्चे मन से भोलेनाथ को फूल, भांग और प्रसाद अपर्ति करने से वह खुश होते हैं और मन चाहा वर देते हैं। शिवरात्रि के दिन पूजा तो हर कोई करता है कि, लेकिन पूजा के बाद कुछ चीजों का ध्यान रखना अति आवश्यक है।

क्‍यों रहता है भगवान शंकर के गले में नाग, हा‍थ में डमरू

पौराण‌िक कथाओं के अनुसार भगवान शिव के दो प्रमुख अस्‍त्र हैं जिसमें से धनुष के आव‌िष्कारक स्वयं श‌िव जी माने जाते हैं, लेक‌िन त्रिशूल उनके पास कैसे पहुंचा इसकी कोई जानकारी नहीं मिलती।

सादाजीवन उच्चविचार का मूर्तिमान आदर्श हैं भगवान शिव

त्याग और तपस्या के प्रतिरुप भगवान शिव लोक-कल्याण के अधिष्ठाता देवता हैं। वे संसार की समस्त विलासिताओं और ऐश्वर्य प्रदर्शन की प्रवृत्तियों से दूर हैं। सर्वशक्ति सम्पन्न होकर भी अहंकार से मुक्त रह पाने का आत्मसंयम उन्हें देवाधिदेव महादेव- पद प्रदान करता है।

शिवलिंग की पूजा में पार्वती−परमेश्वर दोनों की पूजा हो जाती है

शिवलिंग सम्पूर्ण वेदमय, समस्य देवमय, समस्त भूधर, सागर, गगनमिश्रित सम्पूर्ण विश्वब्रह्मांडमय माना जाता है। वह शिवशक्तिमय, त्रिगुणमय और त्रिदेवमय भी सिद्ध होने से सबके लिए उपास्य है। इसीलिये सृष्टि के प्रारम्भ से ही समस्त देवता, ऋषि, मुनि, असुर, मनुष्यादि विभिन्न ज्योतिर्लिंगों, स्वयंभूलिंग, मणिमय, रत्नमय, धातुमय, मृण्मय, पार्थिव तथा मनोमय आदि लिंगों की उपासना करते आये हैं।

भगवान शिव और उनका नाम समस्त मंगलों का मूल है

भगवान शिव और उनका नाम समस्त मंगलों का मूल है। वे कल्याण की जन्मभूमि तथा परम कल्याणमय हैं। समस्त विद्याओं के मूल स्थान भी भगवान शिव ही हैं। ज्ञान, बल, इच्छा और क्रिया शक्ति में भगवान शिव के जैसा कोई नहीं है।

भगवान शिव क्यों कहलाए त्रिपुरारी

कार्तिक मास की पूर्णिमा को त्रिपुरारी पूर्णिमा भी कहते हैं। धर्म ग्रंथों के अनुसार, इसी दिन भगवान शिव ने तारकाक्ष, कमलाक्ष व विद्युन्माली के त्रिपुरों का नाश किया था। त्रिपुरों का नाश करने के कारण ही भगवान शिव का एक नाम त्रिपुरारी भी प्रसिद्ध है।

महाशिवरात्रि व्रत कथा

एक बार एक गाँव में एक शिकारी रहता था। पशुओं की हत्या करके वह अपने कुटुम्ब को पालता था। वह एक साहूकार का ऋणी था, लेकिन उसका ऋण समय पर न चुका सका। क्रोधवश साहूकार ने शिकारी को शिवमठ में बंदी बना लिया।

शिवरात्रि का व्रत करने वाले इस लोक के समस्त भोगों को भोगकर अंत में शिवलोक में जाते हैं

भगवान शिव आदिदेव है, देवों के देव है, महादेव हैं। सभी देवताओं में वे सर्वोच्च हैं, महानतम हैं, दुःखों को हरने वाले हैं। वे कल्याणकारी हंै तो संहारकर्ता भी हैं। प्रतिवर्ष महाशिवरात्रि का पर्व फाल्गुण मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाया जाता है, जो शिवत्व का जन्म दिवस है। यह शिव से मिलन की रात्रि का सुअवसर है।

प्रदोष व्रत का महत्व

हिन्दू धर्म में व्रत और उपवास का बेहद ख़ास महत्व माना जाता है। फिर चाहे वो सप्ताह के दिनों का हो या महीने की तिथियाँ। वैसे तो माह की प्रत्येक तिथि में व्रत रखने का अपना ही महत्व होता है लेकिन इन सभी में सबसे महत्वपूर्ण और लाभकारी त्रयोदशी तिथि के उपवास को माना जाता है।

पश्चिममुखी होकर करें महाकाली का पूजन

फाल्गुन कृष्ण दशमी संध्या के समय मूल नक्षत्र बव करण और हर्षण योग होने के कारण विशेष देवी महाकालीका का पूजन करना श्रेष्ठ रहेगा। कृष्ण पक्ष और दशमी तिथि दशमहाविधा को समर्पित मानी जाती है।

परमात्मा इस सृष्टि के कण कण में विद्यमान है

परमात्मा इस सृष्टि के कण कण में विद्यमान है और इसे सिर्फ गुरु की कृपा से प्राप्त किया जा सकता है। इसका स्वरूप निराकार है और यह स्वयं बना है सारी सृष्टि इसमें समाई है और यह सृष्टि में समाया है। सारे जगत का कर्ता धर्ता यह परमात्मा है।

भारत तो सदियों से “वसुधैव कुटुम्बकम” की अवधारणा को साकार रूप देता आया है

इस संसार के इतिहास को जब हम देखते हैं तो पाते हैं कि यहाँ विविधताएँ हमेशा से रही हैं। यह विविधताएँ किसी दूसरे देश के स्तर से लेकर देश के भीतर भी रही हैं। किसी एक देश में ही संस्कृतियाँ, भाषाएँ, पहनावा, रीति-रिवाज, परम्पराएं, मान्यताएं आदि भिन्न-भिन्न होना उस देश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की परिचायक होती हैं।

संसार रूपी भवसागर को मानव राम नाम के सहारे ही पार कर सकता है

संसार रूपी भवसागर को मानव राम नाम के सहारे ही पार कर सकता है। राम के नाम से कष्ट दूर होंगे और पापों से छुटकारा मिलेगा। यह विचार शहर के छोलियाना महादेव मंदिर परिसर में चल रही राम कथा के चौथे दिन अनिल पाठक महाराज ने कही।

घर के वास्तु दोष को जड़ से खत्म करेंगे ये चिन्ह

वास्तु और फैंगशाई में एेसी कई वस्तुओं का जिक्र किया गया है, जिन्हें घर में रखने से घर केी नैगेटिव एनर्जी दूर होती है और घर में पॉजिटिव का संचार होता है। वहीं वास्तु में कुछ एेसी बातों के बारे में भी बताया गया है जिन्हें अगर घर में रखा जाए तो घर-परिवार पर नैगेटिव इफेक्ट पड़ सकता है।

आपको हमेशा गरीब बनाकर रखती है ये 6 बातें, ध्यान रखने पर बनेंगे धनवान

यदि कई कोशिशों के बाद भी आपके महत्वपूर्ण काम पूरे नहीं हो पा रहे हैं तो इसका कारण घर से जुड़ी कुछ बातें हो सकती हैं। सुनने में ये बातें बहुत ही सामान्य लगती है, लेकिन कई बार ये ही बातें सफलता और कामों में रूकावट का कारण बनती है।

वास्तु में बताई गई बातों को ध्यान में रखे तो उसके जीवन में हर समय सुख-शांति बनी रहती

यदि व्यक्ति वास्तु में बताई गई बातों को ध्यान में रखे तो उसके जीवन में हर समय सुख-शांति बनी रहती है। इसमें कुछ एेसी बातों के बारे में बताया गया है, जिनका विशेष तौर पर ध्यान रखने से व्यक्ति के जीवन से नकारात्मकता का प्रभाव खत्म होता है और सकारात्मकता बढ़ने लगती है। इतना ही नहीं व्यक्ति के घर-परिवार पर भी इसका अच्छा असर पड़ता है। साथ-साथ ही घर में रहने वालों को सफलता और कई लाभ मिलने लगते है।

दक्षिणी भाग में लगा हुआ तुलसी का पौधा फायदे के बदले नुकसान का कारण बन सकता

वास्तुशास्त्र में एेसे कई पेड़-पौधों के बारे में बताया गया है, जिससे घर के दोष को खत्म करने में सहायता होती है। लेकिन इन्हीं पौधों को यदि गलत दिशा में रख दिया जाए तो इनका उल्टा प्रभाव पढ़ने लगता है। इसलिए बहुत जरूरी होता है कि घर आदि किसी भी जगह पर पौधों को लगाने से पहले सही दिशा निर्धारित कर लेनी चाहिए। तो आईए जानें एेसे कुछ पौधों के बारे में जिन्हें घर में सही जगह व सही दिशा में रखने से शुभ फल की प्राप्ति होती है।

महाशिवरात्रि, भोले बाबा की पूजा में इन गलतियों से बचें

महाशिवरात्रि के बारे में शास्त्रों में ये भी कहा गया कि अगर यह व्रत मंगलवार, रविवार और शिवयोग में पड़े तो यह विशेष होता है। महाशिवरात्रि हिन्दुओं का बड़ा पर्व होता है। धर्म शास्त्रों की माने तो भगवान शंकर के पास इस सृष्टि को नष्ट करने की क्षमता है। ऐसे में उन्हें खुश रखना जरूरी है। साथ ही भगवान शंकर सभी देवताओं में सीधे होते हैं, उनकी कृपा बरसते ही जीवन धन्य हो जाता है। इसी वजह से इन्हें भोले बाबा भी कहा जाता है।

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